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ड्रग केस में BJP नेता Beckon के सामने पेश नहीं:2018 में अकाली नेता मजीठिया के खिलाफ CBI कोर्ट में बयान दे चुके बोनी

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जानकारी के अनुसार अमरपाल सिंह बोनी की बुधवार को अजनाला कोर्ट में किसी मामले को लेकर गवाही थी। जिसमें उन्हें समय लग गया। वहीं पटियाला में उन्हें 2 बजे पेश होना था, जो उनके लिए मुश्किल था। अब वह SIT के सामने कब पेश होंगे, इस पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

गौरतलब है कि केस की जांच कर रही SIT ने बिक्रम मजीठिया की पेशी से पहले बोनी अजनाला को बुलाकर यह संकेत दे दिए हैं कि वह केस को और पुख्ता बनाने की तैयारी में है। दरअसल, बोनी अजनाला इसी ड्रग केस से संबंधित बिट्टू औलख मामले में हलफिया बयान दे चुके हैं।

2018 में दिया था बयान

बोनी ने 13 नवंबर 2018 को CBI कोर्ट में भी मजीठिया के खिलाफ अपने बयान दर्ज करवाए थे। उस समय बोनी अकाली दल छोड़ चुके थे। हालांकि लगभग दो साल बाद उन्होंने दोबारा अकाली दल को जॉइन किया और उसके कुछ महीने बाद BJP में चले गए।

पंजाब में मार्च-2022 में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार बनने के बाद बोनी अजनाला की SIT के सामने यह दूसरी पेशी होंगे। इससे पहले वह मई-2022 में भी Park के सामने पेश हुए थे।

बिक्रम सिंह मजीठिया।

मजीठिया पर 2021 में FIR

मजीठिया पर 20 दिसंबर, 2021 को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस एफआईआर में बोनी अजनाला का भी उल्लेख है, जो 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले ही जगदीश भोला ड्रग केस के आरोपियों में शामिल मनिंदर सिंह बिट्टू औलख का समर्थन करते हुए मजीठिया के खिलाफ हो गए थे।

FIR में बोनी, मजीठिया व बिट्‌टू औलख को बताया था करीबी

मजीठिया के खिलाफ FIR में, जगजीत सिंह चहल (जिनकी मोंटेक फार्मा नाम की दवा फैक्ट्री थी) ने रेत खनन कारोबार में मजीठिया और बोनी अजनाला दोनों की कथित संलिप्तता का खुलासा किया था। FIR में लिखा गया था कि बिक्रम सिंह मजीठिया, मनिंदर सिंह औलख उर्फ बिट्टू औलख और बोनी अमरपाल अजनाला के साथ रेत खनन व्यवसाय में शामिल थे।

जबकि, मनिंदर सिंह औलख उर्फ बिट्टू औलख ने कहा है कि बिक्रम सिंह मजीठिया मुक्तसर निवासी कंवरजीत सिंह उर्फ रोजी बरकंदी (मौजूदा विधायक) के साथ रेत खनन कारोबार में शामिल थे।

सुखबीर बादल ने 2020 में बोनी अजनाला की अकाली दल में वापसी करवाई थी।

एक समय मजीठिया के करीबी थी बोनी अजनाला

एक समय बोनी अजनाला अकाली नेता बिक्रम मजीठिया के करीबी हुआ करते थे। लेकिन वे और उनका परिवार 2012 से 2017 तक अकाली सरकार के समय मजीठिया के खिलाफ हो गए। वहीं, 2020 में बोनी अजनाला की अकाली दल में वापसी हुई, लेकिन वे कुछ महीनों के लिए ही थी। सत्ता पलटने के बाद बोनी ने दोबारा अकाली दल छोड़ भाजपा का दामन थामा था।

मार्च 2016 में, शिअद-भाजपा सरकार में मुख्य संसदीय सचिव के रूप में बोनी अजनाला ने अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री स्वर्गीय प्रकाश सिंह बादल और को पत्र लिखा था। आरोप लगाया था कि उनके एक दोस्त मनिंदर सिंह बिट्टू औलख को सुखबीर बादल और बिक्रम मजीठिया के दबाव में जगदीश भोला ड्रग तस्करी मामले में गलत तरीके से फंसाया गया था। 2017 में राज्य में कांग्रेस सरकार बनने के बाद भी बोनी अजनाला ने एक याचिका दायर की थी।

बोनी अजनाला ने जज मेहताब सिंह आयोग को भी यही आरोप देते हुए हलफनामा दिया था। जिसका गठन तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अकाली-भाजपा सरकार के शासन के दौरान दर्ज कथित पुलिस मामलों की जांच के लिए किया था। इतना ही नहीं, बोनी अजनाला मोहाली कोर्ट में जगदीश भोला ड्रग्स मामले में अपने दोस्त बिट्टू औलख के पक्ष में गवाह के रूप में भी पेश हुए और जस्टिस मेहताब सिंह आयोग को दिए हलफनामे में कही गई बातों को दोहराया।

जानें क्या लिखा था हलफनामे में

बोनी अजनाला ने हलफनामे में कहा था कि बिट्टू औलख अमृतसर में एक होटल चलाता है। उनके पिता पूर्व सांसद रतन सिंह अजनाला, जो उस समय शिअद के अमृतसर ग्रामीण अध्यक्ष थे, औलख के होटल में पार्टी की बैठकें करते थे।

उन्होंने 2005 में बिट्टू को बिक्रम सिंह मजीठिया से मिलवाया था और बिट्टू 2012 में मेरा चुनाव एजेंट था और उसने मजीठिया की मदद भी की थी। लेकिन 2012 में फिर से अकाली सरकार बनने के बाद, मजीठिया और उनके (अजनाला) परिवार के बीच दरार बढ़ गई और मजीठिया ने बिट्टू से कहा कि वह हमसे दूर हो जाए या गंभीर परिणाम भुगतने को तैयार रहे।

मेरे दोस्त बिट्टू औलख का किसी भी ड्रग तस्कर से कोई संबंध नहीं है, और उसे हमारे परिवार की छवि खराब करने के लिए झूठा फंसाया गया है। यही मेरे पिता को 2014 में लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए टिकट देने से इनकार करने का कारण बना।

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